कहानी : आभासी हृदय   Leave a comment

(१)

नोवा की उड़नकार हवा में 1000 किमी प्रतिघंटा की रफ़्तार से दौड़ रही थी। अचानक कार के मुख्य कंप्यूटर से आवाज आई, “घातक त्रुटि, कार का स्वचलित उड़नतंत्र पूरी तरह नियंत्रण से बाहर है। कृपया स्वयं नियंत्रण करने का प्रयास करें।” आवाज सुनकर नोवा के चेहरे पर हवाईयाँ उड़ने लगीं। उसने कार को नियंत्रित करने का प्रयास किया मगर कोई फायदा नहीं हुआ। कार अनियंत्रित होकर तेजी से नीचे गिरने लगी। नोवा ने चालक सीट को कार से बाहर उछालने वाला बटन दबाया लेकिन कोई हरकत नहीं हुई। वह फिर से कार को नियंत्रण में लेने का प्रयास करने लगा किंतु उसके सारे प्रयत्न बेकार साबित हुए। कुछ पलों बाद कार जोर से धरती से टकराई और नोवा की चेतना पूरी तरह लुप्त हो गई।

नोवा की आँख खुली तो सबसे पहले उसकी निगाह सामने की दीवार पर टँगे डिजिटल कैलेंडर पर गई। तारीख थी 30 नवंबर सन 2182, यानी उसे पूरे दस दिन बाद होश आया था। उसने अपनी नज़रें इधर उधर घुमाईं तो उसे एक नर्स नज़र आई। उसने नर्स को आवाज दी तो नर्स दौड़ी दौड़ी उसके पास आई। नोवा के करीब आकर नर्स ने बेसब्री से पूछा, “कैसा महसूस कर रहे हैं मिस्टर नोवा। कहीं कोई दर्द तो महसूस नहीं हो रहा है आपको।”

नर्स की बात सुनकर नोवा को महसूस हुआ कि उसका सारा शरीर दुख रहा है लेकिन सबसे ज्यादा दर्द उसके सर में और दिल के आसपास हो रहा था। नोवा ने नर्स को बताया। नर्स बोली, “आपकी पच्चीस हड्डियाँ टूट चुकी थीं, कई का तो चूरा बन गया था। आपकी कुछ हड्डियाँ तो आसानी से जुड़ गईं मगर कुछ हड्डियों को टाइटेनियम की छड़ें लगाकर प्रबलित करना पड़ा और कुछ को पूरी तरह निकालकर टाइटेनियम की छड़ें लगानी पड़ीं। आपकी खोपड़ी के टूटे हुए हिस्से को निकालकर टाइटेनियम की प्लेट लगाई गई है। दर्द अभी कुछ और समय तक रहेगा। शुक्र कीजिए कि आपका दिमाग ज्यादा क्षतिग्रस्त नहीं हुआ केवल कुछ एक तंत्रिकाएँ टूट गई थीं जिनकी जगह हमने कृत्रिम तंत्रिकाएँ लगा दी हैं। अभी हमें ये जाँच करनी है कि सारे आपरेशन पूरी तरह सफल हो गए हैं या नहीं। मैं डॉक्टर को बुलाकर लाती हूँ।”

कुछ पलों बाद नर्स एक डॉक्टर को लेकर आई। डॉक्टर ने आते ही कहा, “आप खुशकिस्मत हैं मिस्टर नोवा जो तीन किलोमीटर की उँचाई से भी गिरकर बच गए”।

“खुशकिस्मत नहीं हूँ डॉक्टर, जीनियस हूँ। मैंने आधुनिक उड़नकार का डिजाइन ही इस तरह बनाया है कि किसी वजह से यदि वह इतनी उँचाई से गिर भी जाय तो कार के चकनाचूर होने के बावजूद उसमें लगा स्वचलित हेलमेट चालक के दिमाग की रक्षा अवश्य कर ले। शरीर के बाकी अंगो के स्थान पर तो कृत्रिम अंग लगाए जा सकते हैं। लेकिन दिमाग में भरी सूचनाएँ दिमाग नष्ट होने के बाद वापस नहीं मिल सकतीं और हम अपने दिमाग में भरी सूचनाओं से ज्यादा और कुछ नहीं हैं।” ऐसा कहकर नोवा ने डॉक्टर से पूछा, “मेरे सर में और दिल के आसपास काफ़ी दर्द क्यों है डॉक्टर?”

“ओह हाँ, शायद नर्स ने आपको बताया नहीं कि आपका दिल काफ़ी क्षतिग्रस्त हो गया था इसलिए हमने उसे निकालकर यांत्रिक हृदय लगा दिया है। ये हृदय अपने काम करने के लिए आवश्यक ऊर्जा सीधे मानव शरीर से ही ग्रहण करता है। आपके शरीर में हो रहे रक्त संचार को दर्शाने वाला यंत्र बाता रहा है कि यांत्रिक हृदय बिल्कुल सही काम रहा है।”

“तो फिर मुझे इतना दर्द क्यों हो रहा है”।

“दरअसल हमारे दिमाग के अलग अलग हिस्से शरीर के अलग अलग अंगों से आने वाले विद्युत संकेतों को समझने का कार्य करते हैं। उदाहरण के लिए हाथों से आने वाले विद्युत संकेतों को समझने के लिए एक विशेष हिस्सा दिमाग में निर्धारित होता है। अगर किसी का हाथ दुर्घटना में कट जाय या कोई बिना हाथ के ही पैदा हो तो दिमाग का वो हिस्सा जो हाथों से आने वाले विद्युत संकेतों को पढ़ता है स्वयं ही कुछ संकेत पैदा करके स्वयं ही उसे पढ़ने लग जाता है। ऐसे में अलग अलग लोगों को अलग अलग अनुभव होते हैं। हम इसे “आभासी बाँह प्रभाव” कहते हैं। कुछ को लगता है कि जैसे उनकी बाँह मोड़ दी गई हो। कुछ को लगता है कि जैसे उन्होंने हाथों से भारी बोझ उठाया हुआ हो। कई तरह के अनुभव लोगों ने बताए हैं। पुस्तकें भरी पडी हैं ऐसे अनुभवों से। ठीक उसी प्रकार यदि किसी का दिल निकालकर मशीनी दिल लगाया जाएगा तो उसके दिमाग का वो हिस्सा जो दिल से विद्युत संकेतों का विनिमय करता है अपने आप कुछ उल्टे सीधे विद्युत संकेत पैदा करके उन्हें समझने लग जाएगा। आपके केस में आपका दिमाग दर्द के विद्युत संकेत उत्पन्न कर रहा है।”

“तो क्या अब मुझे जिंदगी भर इसी दर्द के साथ जीना पड़ेगा।”

“नहीं ऐसा नहीं है। इसे ठीक किया जा सकता है। हम ऐसे रोगियों को एक विशेष प्रकार का हेलमेट पहनने के लिए देते हैं जो एक तरफ तो उनके दिमाग में हो रही हलचलों को पढ़ता है और दूसरी तरफ आँखों के सामने लगे पर्दे पर उनको उनका पूरा शरीर दिखाता है। जब वो अपने शरीर में हरकत होने की कल्पना करते हैं तो हेलमेट में लगा क्वांटम कंप्यूटर उनके दिमाग में हो रही हलचलों का अध्ययन करके पर्दे पर दिख रही छवि को गतिमान करता है। इस तरह धीरे धीरे वो अपनी आभासी बाँह को नियंत्रित करना सीख जाते हैं। हृदय पर दिमाग का पूरा नियंत्रण नहीं होता लेकिन इस हेलमेट के सहारे आप भी अपने दर्द को कम करने की कोशिश कर सकते हैं।”

“मैं अपने घर कब जा सकता हूँ”।

“एक सप्ताह और आपको यहाँ रुकना पड़ेगा। उसके बाद आप जा सकते हैं। हम आपको वो दवाएँ पहले से ही दे रहे हैं जो घावों को तीव्र गति से भरती हैं”।

(२)

एक सप्ताह बाद।

ऐसा लगता था जैसे सारी इमारत शीशे की बनी हो। इमारत की सबसे उँची मंजिल नीचे से दिखाई भी नहीं पड़ती थी। बाहर से देखने पर पूरी इमारत में स्क्रीनें ही स्कीनें नज़र आ रही थीं। अलग अलग स्क्रीनों पर अलग अलग यंत्रों के विज्ञापन दिखाए जा रहे थे। कुछ स्क्रीनों को मिलाकर एक बड़ी सी स्क्रीन बन रही थी जिस पर ‘नोवा प्रौद्योगिकी एवं अनुसंधान केंद्र’ लिखा हुआ था। यह सन 2182 की सबसे बड़ी आधुनिक यंत्र निर्माता कंपनी थी। इसी इमारत के एक कमरे में नोवा का भव्य दफ़्तर था। दफ़्तर की दाईं दीवार के बीचोबीच एक स्वचलित दरवाजा था जो नोवा के खूबसूरत शयनकक्ष में खुलता था। बाईं तरफ की दीवार में लगा दरवाजा एक विशालकाय कमरे में खुलता था जिसमें उच्चाधिकारिओं की बैठक होती थी।

नोवा अपने क्वांटम कंप्यूटर पर वो सारी गणनाएँ फिर से देख रहा था जो उसकी उड़नकार में लगे कंप्यूटर ने दुर्घटना के ठीक पहले की थीं। उसकी कार के टूटे फूटे पुर्जे इकट्ठा करके उसकी कार्यशाला में पहुँचा दिए गए थे। कार में लगा सूचना संग्रहण केंद्र नष्ट होने से बच गया था इसलिए दुर्घटना के पहले का सारा आँकड़ा उसके पास उपलब्ध था। तभी मेज पर रखे त्रिविमीय चलचित्र दूरभाष पर एक खूबसूरत लड़की का त्रिविमीय चित्र दिखाई पड़ने लगा। दूसरे ही पल कमरे में लड़की की खनकदार आवाज़ गूँज उठी। “सर, आकाशगंगा अनुसंधान संस्थान की मालकिन एवं प्रबंध निदेशक मर्करी के साथ आपकी बैठक तीन दिन पहले प्रस्तावित थी लेकिन आपकी दुर्घटना के कारण वो टाल दी गई थी। आज उन्होंने त्रिविमीय चलचित्र दूरभाष पर आपके जल्दी स्वस्थ होने के लिए शुभकामनाएँ भेजी हैं और कहा है कि अगर आप आज ही ये बैठक कर लें तो अच्छा रहेगा वरना उनके पास दूसरे कई योग्य पुरुषों के प्रस्ताव आ रहे हैं।”

नोवा के दिमाग को झटका सा लगा। उसे याद आया कि ये बैठक तीन दिन पहले होनी थी और दुर्घटना के कारण उसके ध्यान से ही उतर गई थी। नोवा ने अपने क्वांटम कंप्यूटर की तरफ देखा। अभी तक दुर्घटना का कोई कारण उसकी समझ में नहीं आया था। उसे पता था कि अगर जल्द ही उसने इसका कारण नहीं खोजा तो बाजार में उड़नकार और उसकी कंपनी दोनों की शाख पर बट्टा लग जाएगा। उसने अपनी सचिव से कहा, “उनसे कहो कि वो अभी यहाँ आ जाएँ। मैं तुरंत उनके साथ बैठक करने को तैयार हूँ।”

थोड़ी देर बाद मर्करी ने अपनी उड़नकार नोवा के दफ़्तर वाली मंजिल की पार्किंग में खड़ी की और बैठक कक्ष की ओर बढ़ी। नोवा की सचिव ने उसे सूचना दी और नोवा उठकर दीवार में लगे दरवाजे से बैठक कक्ष में दाखिल हुआ। बात मर्करी ने शुरू की, “देखिए मुझे आपके बच्चों की जैविक माँ बनने में कोई आपत्ति नहीं है। पर मेरी कुछ शर्तें हैं।”

“क्या शर्तें हैं?” नोवा ने कहा।

“हम एक बेटी और एक बेटे के जैविक माँ बाप बनेंगे। हम दोनों अपनी अपनी कंपनी का पच्चीस प्रतिशत हिस्सा हर बच्चे के नाम करेंगे। गर्भधारण के लिए स्लम की किसी स्त्री की कोख किराये पर ले लेंगे। वही स्त्री बड़े होने तक उन बच्चों को पालेगी फिर उसे उसका उचित मूल्य चुकाकर विदा कर देंगे। आजकल सारे प्रभावशाली लोग ऐसा ही करते हैं। किसके पास बच्चे पैदा करने और पालने का समय है? वैसे भी मेरे और आपके सबसे अच्छे गुणसूत्रों से मिलकर बने बच्चे स्वयं ही इतनी प्रखर बुद्धि वाले होंगे कि हमें ज्यादा चिंता करने की कोई आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी।”

“मुझे आपकी शर्तें मंजूर हैं। मैं अपने डॉक्टर से मिलकर सबकुछ तय करके आपको बताता हूँ।” ऐसा कहकर नोवा ने मुस्कुराते हुए मर्करी से हाथ मिलाया। नोवा ने सोचा ऐसी शर्तें तो आजकल हर नौकरीपेशा लड़की रखती है और फिर ये तो इतनी बड़ी कंपनी की मालकिन है। अपने बच्चों की माँ के रूप में इतनी खूबसूरत और बुद्धिमान लड़की पाकर उसे थोड़ा गर्व भी हुआ।

“और हाँ, इस बैठक की वीडियो रिकार्डिंग की एक प्रति मुझको और एक प्रति सार्वजनिक रिकार्ड कार्यालय में मेल कर दीजिएगा। उसके बाद हम दोनों कानूनी तौर पर आनंद लेने के लिए एक दूसरे के त्रिविमीय चित्र का प्रयोग अपने कामक्रीडा यंत्र में कर सकेंगे।” कहकर मर्करी बैठक कक्ष से मुस्कुराती हुई बाहर निकल गई।

बैठक के बाद नोवा अपने कमरे में वापस आया। उसके सर में और दिल के आसपास अचानक दर्द उठना शुरू हो गया था। उसने डॉक्टर से त्रिविमीय चलचित्र दूरभाष पर संपर्क किया तो डॉक्टर की आकृति उसके दूरभाष यंत्र पर प्रकट हुई। नोवा ने कहा, “मैं पिछले एक सप्ताह से आपके दिए हेलमेट द्वारा दर्द को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहा हूँ पर कोई फायदा नहीं हो रहा है।”

“अच्छा! मगर हमारे पुराने रोगियों को तो इस हेलमेट से बहुत फायदा हुआ था। आप अस्पताल आ जाइए। आपका एक बार फिर से चेकअप करता हूँ।” डॉक्टर ने कहा।

“हाँ एक बात और, आकाशगंगा अनुसंधान संस्थान की प्रबंध निदेशक मर्करी अपने अंडाणु देने को तैयार हो गई हैं। आप समय निश्चित कर लीजिए हम दोनों आकर आपके यंत्रों को अपने अंडाणु और शुक्राणु दे देंगे। आप उनमें से जो सबसे अच्छे हों छाँट कर एक भ्रूण तैयार कीजिएगा। फिर उस भ्रूण को स्लम से किसी अच्छी लड़की को किराए पर लेकर उसके गर्भ में डाल देंगे।” नोवा ने कहा।

“तो आप लोग विवाह कब रहे हैं” डॉक्टर ने कहा।

“विवाह के लिए तो काफी समय निकालना पड़ेगा और आप तो जानते ही हैं कि मैं और मर्करी दोनों ही कितने व्यस्त रहते हैं। बहरहाल विवाह जब भी करेंगे आपको जरूर बुलाएँगें चिंता मत कीजिए।” नोवा ने मुस्कुराते हुए कहा और संबंध विच्छेद कर दिया।

(३)

अगले दिन नोवा का चेकअप करने के बाद डॉक्टर ने कहा, “यूँ तो मुझे कोई समस्या नज़र नहीं आती लेकिन आप के दिमाग की कुछ तंत्रिकाओं को भी हमने कृत्रिम तंत्रिकाओं से बदला था। हो सकता है ये कृत्रिम तंत्रिकाएँ आपके मस्तिष्क पर कोई अनचाहा प्रभाव डाल रही हों। इस संबंध में कृत्रिम तंत्रिकाओं के आविष्कारक और विशेषज्ञ डॉक्टर सप्तऋषि से बात करनी पड़ेगी। वो ही इस पर ज्यादा रोशनी डाल सकेंगे। चलिए उन्हीं के संस्थान में चलते हैं, मुझे भी उनसे कुछ आवश्यक काम था।”

“डॉक्टर सप्तऋषि तो मेरे स्वर्गवासी पिताजी के बचपन के दोस्त हैं।” नोवा ने कहा।

“अच्छा, तब तो हमारे लिए और भी आसानी हो जाएगी।” डॉक्टर ने कहा।

थोड़ी देर बाद दोनों डॉक्टर सप्तऋषि के कार्यालय में बैठे थे। डॉक्टर सप्तऋषि ने पूरी बात सुनने के बाद कहा, “तो आखिकार जिस हृदय को हमने नियंत्रित किया था वो हृदय ही नहीं रहा।”

“क्या मतलब” डॉक्टर और नोवा एक साथ बोल उठे।

“एक लंबी कहानी है नोवा। मैं और तुम्हारे पिता इसी शहर में पैदा हुए और पले बढ़े। हमारे बचपन में तुम्हारे दादा पूँजीवादी पार्टी के प्रमुख कार्यकर्ता हुआ करते थे। पूँजीवादी पार्टी सारे पूँजीपतियों ने अपने हितों की रक्षा करने के लिए बनाई थी। पूँजीवादी कुछ तथाकथित समाजसेवियों के सहारे एक अलग सरकार लाना चाहते थे जो पूरी तरह से पूँजीवादियों के नियंत्रण में रहे। मुझे और तुम्हारे पापा को संसाधनों की कभी कोई कमी नहीं रही। इसलिए हमने बड़ी आसानी से दुनिया के सबसे अच्छे कॉलेज में प्रवेश पा लिया। तुम्हारी माँ गाँव से थीं किंतु उनकी बुद्धि विलक्षण थी। उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी मेहनत और बुद्धि के दम पर उस परीक्षा को उत्तीर्ण किया और छात्रवृत्ति प्राप्त की। वो बुद्धिमान भी थीं और खूबसूरत भी। हम दोनों ही तुम्हारी माँ को चाहने लगे। कॉलेज में हम तीनों दोस्तों का समूह प्रसिद्ध था। मैं तुम्हारी माँ से प्यार करता हूँ ये बात मैंने न कभी तुम्हारी माँ को बताई न तुम्हारे पिता को। तुम्हारे माता पिता की शादी हो जाने के बाद मैंने तुम्हारे पिता को सच बताया और कह दिया कि अब मैं तुम्हारे घर कभी नहीं आ पाऊँगा। ये जानकर तुम्हारे पिताजी बहुत दुखी हुए कि दोस्त होते हुए भी मैंने उनको कभी इस बात का पता नहीं चलने दिया। पर अंत में सबकी भलाई के लिए उन्होंने मेरी बात मान ली। उसके बाद जब भी तुम्हारी माँ से मेरी बात होती और वो मुझे घर पर बुलाती मैं हमेशा यही कोशिश करता कि मुझे न जाना पड़े। मैं कोई न कोई बहाना बनाकर टाल दिया करता लेकिन उनकी शादी की सालगिरह और तुम्हारा जन्मदिन ऐसे मौके होते जब मेरी एक न चलती। जब भी मैं तुम्हारी माँ से मिलता मेरे दिल में एक टीस सी उठती। मैं उन्हें भुलाने की जितनी कोशिश करता उतना ही ज्यादा उनकी यादें मुझे परेशान करती थीं। अंत में तंग आकर मैंने ऐसी तंत्रिकाएँ बनाईं जो दिमाग में प्रत्यारोपित करने पर दिमाग के किसी खास हिस्से के विद्युत प्रवाह में बाधा पैदा करती थीं। इन तंत्रिकाओं को दिमाग के बाहर से ही चुंबकीय क्षेत्र द्वारा प्रोगाम किया जा सकता था। मैंने अपने कुछ मरीजों पर इसका प्रयोग भी किया जो अपनी बुरी यादों से मुक्ति पाना चाहते थे। ये तंत्रिकाएँ बुरी यादों में बाधा तो पहुँचाती थी मगर उन्हें जितना आवश्यक था उतना दबा नहीं पाती थीं। उन दिनों तुम्हारे पिता कृत्रिम हृदय की खोज में लगे हुए थे। उन्होंने हृदय और दिमाग को जोड़ने वाली तंत्रिकाओं का गहरा अध्ययन किया था। एक दिन बात बात में मैंने उन्हें अपने इस प्रयोग के बारे में बताया तो उन्होंने कहा कि शरीर के कुछ विशिष्ट हार्मोन ही हमें भावुक बनाते हैं। इनके श्रावित होने से हमारे दिमाग के कुछ विशेष हिस्सों द्वारा विद्युत संकेतों को उत्पन्न करने एवं पढ़ने की प्रक्रिया बहुत बढ़ जाती है। तब हमारा दिमाग दिल को ये आदेश देता है कि इन खास हिस्सों में तेजी से रक्त की आपूर्ति की जाय। यदि हम दिल और दिमाग की उन तंत्रिकाओं को जिनके माध्यम से दिमाग दिल को संदेश भेजता है तुम्हारी कृत्रिम तंत्रिकाओं से बदल दें तो हम उनको इस प्रकार प्रोग्राम कर सकते हैं कि जब भी ये हार्मोन, जो भावुकता पैदा करते हैं, शरीर में बनें तब ये तंत्रिकाएँ दिमाग और दिल के बीच विद्युत संकेतों का विनिमय ही न होने दें। जब दिमाग के इन हिस्सों को रक्त ही नहीं मिलेगा तो वो क्रियाशील ही नहीं हो पाएँगें। हारकर दिमाग को उन हिस्सों से काम लेना पड़ेगा जिनमें रक्त तो उपलब्ध होगा पर बुरी यादें नहीं होंगी। इस तरह धीरे धीरे सारी बुरी यादें धुँधली पड़ जाएँगी और एक दिन दिमाग उन पर दूसरे आँकड़े लिखकर उन्हें मिटा देगा। जो बातें इंसान दुहरा नहीं पाता या जिनको याद रखने में इंसान को दिक्कत होती है वो बातें समय के साथ अपने आप मिट जाती हैं।” इतना कहकर डॉक्टर सप्तऋषि रुके और उन्होंने मेज से उठाकर एक गिलास पानी पिया। वातानुकूलित कमरा होने के बावजूद उनके माथे पर पसीना आने लगा था।

“फिर मैंने तुम्हारे पिता जी द्वारा सुझाए गए रास्ते को अपनाते हुए अपने रोगियों पर इसका परीक्षण किया। नतीजे आश्चर्यजनक थे। मगर हर अच्छी दवा की तरह इसका भी एक साइड इफ़ेक्ट था। भावुक करने वाले हार्मोनों का शरीर पर असर न होने से कुछ समय बाद शरीर इन हार्मोनों का निर्माण भी कम कर देता था। यानी बुरी यादों के साथ साथ लोगों की भावुकता भी कम होने लगी। पर बहुतेरे लोगों को ये साइड इफ़ेक्ट नहीं वरदान लगता था। इंसान भावुक न हो और वो सिर्फ़ हानि लाभ के बारे में ही सोचे तो उसे सफल होने से कौन रोक सकता है। मगर मैंने साइड इफ़ेक्ट के कारण इस इलाज का प्रयोग बंद कर दिया। बहुत सारे दूसरे डॉक्टरों ने भी साइड इफ़ेक्ट देखते हुए इस इलाज का प्रयोग बंद किया लेकिन कुछ डॉक्टर फिर भी इस तरीके का प्रयोग कर रहे थे। उन्हीं दिनों पूँजीवादी पार्टी चुनाव जीतकर सत्ता में आई थी। तुम्हारे दादा स्वास्थ्य मंत्री बनाए गए। तुम्हारे पिताजी ने तुम्हारे दादाजी की मदद से इस इलाज पर पूरी तरह से रोग लगवा दी। इस साइड इफ़ेक्ट के कारण खुद पर इस इलाज का प्रयोग करने की मेरी हिम्मत नहीं हुई। इसका एक कारण शायद ये भी रहा हो कि मेरे दिमाग का कोई कोना तुम्हारी माँ को हमेशा याद रखना चाहता था।”

“पर आपके इस आविष्कार का मुझसे क्या संबंध है।”

“वही तो बताने जा रहा हूँ। ऊँची ऊँची इमारतों के बावजूद शहरों में जगह कम पड़ रही थी। इसलिए पूँजीवादी सरकार ने आते ही शहरों के विस्तार पर लगी सीमाएँ समाप्त कर दीं। जहाँ पहले गाँव थे वो जमीन धड़ाधड़ पूँजीपतियों ने खरीदनी शुरू की। जहाँ पहले खेत थे धीरे धीरे वहाँ कारखाने, इमारतें, प्रयोगशालाएँ, बड़ी बड़ी सौर ऊर्जा परियोजनाएँ, अस्पताल, कॉलेज वैगरह खुलने लगे। आधुनिक यंत्रों की मदद से कुछ ही सालों में गाँवों को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया। फसलें उगाने का काम बड़ी बड़ी कंपनियों द्वारा विशालकाय बहुमंजिली खेत बनाकर किया जाने लगा। जिनके पास जमीनें थीं उन्होंने मुआवजे में मिले धन से फ़्लैट खरीद लिए और छोटी मोटी नौकरी करके गुजर बसर करने लगे। जिनके पास जमीन बहुत कम थी या नहीं थी और जो केवल मजदूरी करके गुजर बसर करते थे उन सबको एक नया कानून बनाकर थोड़ा सा मुआवजा और स्लम में झोपड़ियाँ दे दी गईं। इस तरह धीरे धीरे दुनिया में शहर, स्लम और जंगल ही रह गए। जिस दिन हम भारी मात्रा में सस्ती ऑक्सीजन बनाने का कोई विकल्प खोज लेंगे शायद हमें जंगलों की भी आवश्यकता नहीं रह जाएगी। अब तक तो तुम्हारा दिमाग उन दिनों की यादों को पूरी तरह मिटा चुका होगा जिन दिनों तुम्हारे पापा की कंपनी उड़नकार का वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करने ही वाली थी और उड़नकार के परीक्षण आखिरी दौर में थे। नाभिकीय ऊर्जा से चलने वाली इस कार का डिजाइन तुम्हारी माँ ने तैयार किया था। तब तुम अठारह साल के थे। एक दिन तुम्हारी जिद पर तुम्हारे पापा तुम्हें साथ लेकर उड़नकार का परीक्षण करने निकले। रास्ते में अचानक कार के कंट्रोल खराब हो गए। तुम्हारे पापा तुम्हें लेकर इजेक्टर सीट की मदद से बाहर निकल गए लेकिन कार जमीन से टकराकर पूरी तरह नष्ट हो गयी। ये वो दिन थे जब दुनिया भर में स्लम वालों ने अपने मानवाधिकारो के लिए शहर के लोगों से युद्ध छेड़ा हुआ था। तुम्हारे पापा तुम्हें लेकर सुरक्षित उतर तो गए लेकिन स्लम में। स्लम वालों ने तुम्हारे और तुम्हारे पापा के शरीर पर लगे सारे ट्रैकिंग यंत्र नष्ट कर दिए और तुम दोनों को कैद कर लिया। ट्रैकिंग यंत्र नष्ट होने पर हम सबने यही समझा कि स्लम वालों ने तुम दोनों को मार दिया है। तब तुम्हारे पापा की कंपनी हथियार भी बनाया करती थी। स्लम वालों ने उन हथियारों का डिजाइन हासिल करने के लिए तुम्हारे पापा को तरह तरह की यंत्रणाएँ दीं, लेकिन तुम्हारे पापा नहीं टूटे। पर अंत में जब उन्होंने तुम्हें नुकसान पहुँचाने की बात की तो तुम्हारे पापा को मानना पड़ा। फिर कुछ ही दिनों में इन हथियारों का डिजाइन एक स्लम से दूसरे स्लम तक होता हुआ सारी दुनिया में पहुँच गया। तुम्हारे पापा द्वारा सहयोग करने के बाद उन्होंने तुम्हें वहाँ घूमने फिरने की इज़ाजत दे दी थी। पता नहीं कैसे, क्योंकि ये तुम ही बता सकते थे और तुम्हें कुछ याद नहीं होगा, तुम्हारी दोस्ती स्लम की एक लड़की से हो गई जिसने तुम्हें शहर में रहने वालों के खिलाफ़ भड़काना शुरू कर दिया। धीरे धीरे तुम्हें लगने लगा कि वो जो कुछ भी कह रही है वो सब सच है। उधर स्लम के पास खतरनाक हथियार आ जाने पर आखिरकार शहर वालों को उनके साथ शांति वार्ता करनी ही पड़ी। उसमें यह निर्णय लिया गया कि सारे स्लम स्वतंत्र कर दिए जाएँगें और स्लम तथा शहर के बीच आने जाने के लिए विशेष प्रकार के पहचान पत्र जारी किए जाएँगें जिससे स्लम के लोग शहर में आकर लूटपाट न कर सकें और शहर वाले स्लम के लोगों का शोषण न कर सकें। जब भी शहर को स्लम की या स्लम को शहर की सेवाओं की जरूरत पड़ेगी तो उन सेवाओं का उचित मूल्य देकर स्लम और शहर की एक साझा कंपनी के जरिए प्राप्त किया जाएगा।” इतना कहकर डॉक्टर सप्तऋषि ने नोवा की तरफ देखा।

“फिर क्या हुआ”। नोवा ने फौरन कहा।

“तुम्हारे पापा ने स्लम वालों को हथियारों का डिजाइन तो दिया था लेकिन उस डिजाइन में एक ऐसा सर्किट जोड़ दिया था जो उपग्रह से नियंत्रित किया जा सकता था। ये ऐसा सर्किट था जो उन हथियारों को बड़े ही विध्वंसक तरीके से स्वतः नष्ट कर सकता था। स्लम से बाहर आते ही तुम्हारे पापा ने ऐसा इंतजाम किया कि जैसे ही उन हथियारों को एक्टिवेट किया जाय वो हथियार स्वतः नष्ट हो जाएँ। इससे स्लम के हजारों लोग मारे गए। मारे जाने वालों में उस लड़की के माँ बाप भी थे जिससे तुम्हारी दोस्ती हुई थी। जब तुम्हें ये बात पता चली तो तुम अपने पापा से लड़ने पहुँच गए। उधर स्लम के हथियार नष्ट होते ही पूँजीवादी पार्टी ने शहर की सेना को स्लम पर फिर से आक्रमण करने का आदेश दिया। तुम अपने पापा से झगड़ा करके उड़नकार लेकर स्लम की तरफ जा रहे थे कि तुम्हारी कार एक अतिशक्तिशाली लेजर बीम की चपेट में आकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई और तुम्हारे सर में काफ़ी चोटें आईं। जब तुम्हारे पिता को पता चला तो उन्होंने मुझे बुलाया और उस पुराने प्रयोग को तुमपर आजमाने के लिए कहा ताकि तुम स्लम और उससे जुड़ी सारी बातें भूल सको। उन दिनों तुम्हें लगातार बेहोश रखा जा रहा था ताकि तुम होश में आकर कोई हंगामा न खड़ा करो। पहले तो मैं इस गैरकानूनी और अनैतिक काम के लिए तैयार नहीं था। पर तुम्हारे पापा ने तुम्हारे दादाजी की मदद से इस प्रयोग को एक घंटे के भीतर ही पुनः कानूनी मान्यता दिलाई और एक दूसरे डॉक्टर को इस काम के लिए राजी कर लिया। जब मैंने देखा कि मेरे इनकार का कोई फायदा ही नहीं है और नया डॉक्टर इस मामले में अनुभवहीन है और वो कोई बड़ी गड़बड़ कर सकता है तो मैंने हाँ कर दी। आखिरकार हमने तुम्हारे दिमाग में कृत्रिम तंत्रिकाएँ लगा दीं। जब तुम होश में आए तो तुम्हारे दिमाग में पुरानी घटनाओं की बहुत हल्की हल्की यादें ही बची थी। तुमने अपने पिता जी को इन अजीब यादों के बारे में बताया तो उन्होंने कहा कि तुम बहुत दिनों तक बेहोश थे और तुमने बेहोशी की हालत में कोई सपना देखा होगा। क्योंकि तुम्हारे दिमाग में कुछ भी स्पष्ट नहीं था केवल कुछ धुँधली सी यादें थीं इसलिए तुम्हें उनकी सच लगी। धीरे धीरे तुम्हारे दिमाग ने उन यादों को मिटा दिया। इसके बाद की बातें तो तुम्हें याद ही होंगी कि स्लम पर हमारा पूरी तरह कब्जा हो गया और वो अबतक बरकरार है। हम स्लम की सेवाएँ अपनी मनमाफ़िक दरों पर ले सकते हैं और उनको सेवाएँ देने के बदले मनचाहे पैसे वसूलते हैं। इस प्रयोग को कानूनी मान्यता मिलने के बाद धड़ल्ले से इसका प्रयोग होने लगा। सारे पूँजीपति अपने बच्चों के मस्तिष्क में ये कृत्रिम तंत्रिकाएँ लगवाने लगे ताकि उनकी भावुकता समय के साथ नष्ट हो जाय और वो अच्छे बिजनेसमैन बन सकें। आज पूँजीवादी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी है और उसके मुकाबले केवल स्लम की पार्टी ही खड़ी होने की हिम्मत करती है। लेकिन चुनावों में अपने पैसे और प्रौद्योगिक ज्ञान की मदद से हमेशा पूँजीवादी पार्टी ही विजयी होती है।”

“तो क्या आकाशगंगा अनुसंधान संस्थान की प्रबंध निदेशक मर्करी के दिमाग में भी ऐसी तंत्रिकाएँ लगी हुई हैं जो दुखद यादों और भावनाओं को नियंत्रित करती हैं।” नोवा ने पूछा।

“ये पूछो कि ऐसा कौन है जिसके मस्तिष्क में ये कृत्रिम तंत्रिकाएँ नहीं लगीं। जो भी शीघ्रातिशीघ्र शीर्ष पर पहुँचा है इन्हीं कृत्रिम तंत्रिकाओं की मदद से पहुँचा है।”

“लेकिन मुझे तो दर्द के अलावा और कोई परेशानी नहीं है और मेरे दिमाग में तो वो तंत्रिकाएँ अभी भी होंगी। क्या अब वो मेरे दिल को नियंत्रित नहीं कर रही हैं।” नोवा ने कहा।

“तुम्हारे दिमाग में वो कृत्रिम तंत्रिकाएँ तो हैं लेकिन अब तुम्हारे दिल को दिमाग से आदेश लेने की आवश्यक्ता नहीं है। तुम्हारे दिल में लगा क्वांटम कंप्यूटर तुम्हारे दिमाग के चुंबकीय क्षेत्र में हो रहे परिवर्तनों को दूर से ही पढ़ सकता है और आवश्यकतानुसार दिमाग के सक्रिय हिस्सों में रक्त भेज देता है। अब तुम्हारे दिल को इस तरह नियंत्रित नहीं किया जा सकता। लेकिन तुम्हारे दिमाग के कुछ हिस्सों को बहुत समय बाद सही मात्रा में रक्त मिला है इसलिए उन हिस्सों में जो बची खुची यादें हैं वो वापस आने की कोशिश कर रही हैं। मेरे विचार में तुम्हारा दिमाग उन बची खुची यादों को अपने पास उपस्थित आँकड़ों के आधार पर पहचानने और सुव्यवस्थित करने का प्रयास कर रहा है। जब तक वो ऐसा नहीं कर लेता तुम्हें लगातार सिरदर्द का अहसास होता रहेगा।”

“लेकिन मेरे दिल में दर्द क्यों हो रहा है। जबकि ये तो कृत्रिम हृदय है इसमें तो दर्द होना ही नहीं चाहिए।” नोवा ने कहा।

“इसका जवाब तो तुम्हें डॉक्टर साहब दे ही चुके हैं कि तुम्हारे अवचेतन मस्तिषक को ये पता नहीं है कि तुम्हारे सीने में कृत्रिम हृदय लगा हुआ है। तुम्हारे दिमाग को रक्त सही मात्रा में मिल रहा है इसलिए वो समझता है कि तुम्हारे सीने में दिल अभी भी धड़क रहा है। लेकिन उसको दिल से विद्युत संकेत नहीं प्राप्त हो रहे हैं इसलिए वो स्वतः कुछ विद्युत संकेत उत्पन्न कर रहा है। ये दर्द के विद्युत संकेत हैं। इसी को “आभासी हृदय प्रभाव” कहते हैं जो डॉक्टर तुम्हें पहले ही बता चुके हैं। ये दर्द धीरे धीरे समय के साथ ही खत्म होगा। आज मुझे लग रहा है जैसे मेरे सीने से कोई बोझ उतर गया। सच कहूँ तो तुम्हारी उस शल्य चिकित्सा के लिए मैं कभी अपने आप को माफ नहीं कर पाया।”

(४)

नोवा अपने विशाल शयनकक्ष में सोया हुआ था। उसके माथे पर आई पसीने की बूँदों से लग रहा था कि वो कोई बहुत बुरा सपना देख रहा है। अचानक उसकी नींद खुल गई और एक चीख के साथ वो उठ बैठा। शयनकक्ष की दीवारें सुबह होने पर भीतर से पारदर्शी हो गई थीं और बाहर सुबह का लाल सूरज दिख रहा था। नोवा ने बिस्तर पर लेटे लेटे ही दूरभाष पर डॉक्टर सप्तऋषि से बात करके आपात्कालीन बैठक तय की। थोड़ी देर बाद वो डॉक्टर सप्तऋषि के कार्यालय में बैठा उन्हें अपने सपने के बारे में बता रहा था।

“कल रात भर मुझे अजीब अजीब सपने आते रहे। सुबह जब मैं जागा तो मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था लेकिन अब मुझे समझ में आ गया है ये स्वप्न नहीं वो यादें थी जो आपके अनुसार मेरा दिमाग मिटा चुका था। स्लम की जिस लड़की की बात आप कर रहे थे उसका नाम मीथेन था और उसने तभी मुझे बता दिया था कि पूँजीवादी पार्टी सत्ता में आने के बाद केवल पूँजींपतियों का ही हित चाहती है और उसके लिए स्लम का पूरी तरह शोषण कर रही है। हर बार अपने संसाधनों एवं प्रौद्योगिकी की मदद से चुनाव में गड़बड़ियाँ करवाती है और जीत जाती है। यदि ऐसा ही चलता रहा तो स्लम की पार्टी कभी चुनाव जीत ही नहीं पाएगी और हम यूँ ही पिसते रहेंगे। मुझे ये भी याद आ गया है कि जब मैं उड़नकार से स्लम की तरफ जा रहा था और मेरी कार से शक्तिशाली लेजर किरणें टकराई थीं तो मैं अपनी ही सेना के ऊपर से उड़ रहा था। हो सकता है कि पिताजी ने ही इसका प्रबंध करवाया हो ताकि मैं स्लम तक न पहुँच सकूँ। वो लड़की भी मीथेन ही थी जो पिताजी के ही बम को शरीर पर बाँधकर मेरे माता पिता के कार्यालय में पहुँची थी और वहाँ पहुँचकर बम को एक्टिवेट कर लिया था और अपने साथ साथ मेरे माता पिता को भी उड़ा दिया था। वो पिताजी के आफ़िस का कमरा नम्बर पूछने के लिए मेरे ही कमरे में आई थी और पता पूछने के बाद उसने विदा नहीं अलविदा कहा था और मैं उसे पहचान भी नहीं पाया। शायद वो आखिरी बार मुझे देखने आई थी।” नोवा ने कहा।

डॉक्टर सप्तऋषि बोले, “इसका अर्थ तो ये हुआ कि हम अब तक गलत समझते थे कि दिमाग यादों को मिटा देता है। लगता है कि जब दिमाग पर यादों को मिटा देने का दबाव डाला जाता है तो वो इन्हें दिमाग में गहरे छुपाकर उस हिस्से को अक्रिय कर देता है। लेकिन दबाव हटते ही फिर सारी यादें बाहर निकाल लाता है। इसका अर्थ हुआ कि दिमाग पर इतनी ज्यादा खोजें होने के बावजूद भी हम अभी तक इसे पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं। लेकिन आज मैं बहुत हल्का महसूस कर रहा हूँ क्योंकि इसका अर्थ ये है कि वो सभी दिमाग जो कृत्रिम तंत्रिकाएँ लगने से भावनाहीन हो चुके हैं उन्हें ठीक किया जा सकता है।”

“कैसे ठीक किया जा सकता है?” नोवा ने कहा।

“जैसा तुम्हारे साथ हुआ है उसके अनुसार तो लगता है कि दिमाग स्वयं को खुद ही ठीक कर लेगा अगर हम उन कृत्रिम तंत्रिकाओं को रीप्रोग्राम कर दें।” सप्तऋषि ने कहा।

“वो तो ठीक है लेकिन इतने लोगों के दिमाग में लगी कृत्रिम तंत्रिकाएँ एक साथ रीप्रोग्राम होंगी कैसे? इस तरह के सारे लोग भावनाहीन होने का लाभ उठा रहे हैं। अगर हम उन्हें सारी बात बताएँ और वो हम पर विश्वास कर भी लें तो भी अपनी मर्जी से तो वो लोग अपना लाभ छोड़ने से रहे।” नोवा ने कहा।

“कुछ न कुछ तो करना ही पड़ेगा। तुम्हारी कंपनी के बनाए उपकरण तो घर घर में हैं क्या उनमें से कोई ऐसा उपकरण नहीं है जो सर्विस करने के लिए तुम्हारी कंपनी के सेवा केंद्रों में आता हो और जिसको इन तंत्रिकाओं को रीप्रोग्राम करने के लिए प्रोग्राम किया जा सके। एक बात और उपकरण ऐसा होना चाहिए जो सर पर पहना जाता हो और जिसमें क्वांटम कंप्यूटर और दिमाग का चुंबकीय स्कैन करने वाला यंत्र भी लगा हो।” सप्तऋषि ने कहा।

“अरे! ऐसी एक चीज है तो। उड़नकार में लगा हेलमेट, जिसमें क्वांटम कंप्यूटर भी है और मस्तिष्क का चुंबकीय स्कैन करने वाला यंत्र भी। लेकिन दिक्कत ये है कि ये हेलमेट हमें मर्करी की कंपनी “आकाशगंगा अनुसंधान केंद्र” सप्लाई करती है। दर’असल ये हेलमेट मूलतः अंतरिक्ष यात्रियों के लिए डिजाइन किया गया था ताकि ये ब्रह्मांडीय विकिरण को जहाँ तक हो सके दिमाग में पहुँचने से रोके और यदि उसकी मात्रा ज्यादा हो तो खतरे का संकेत भी दे सके। बाद में हमने ये हेलमेट उड़नकार में लगवाया क्योंकि आधुनिक उड़नकारें काफी उँचाई तक जाती हैं और ऐसे में दिमाग पर विकिरण का कुप्रभाव पड़ सकता है।” नोवा ने कहा।

“ये तो एक और समस्या आ गई। अब मर्करी को इस काम के लिए कैसे राजी करेंगे।” सप्तऋषि ने कहा।

“वो आप मुझ पर छोड़ दीजिए।” नोवा ने मुस्कुराते हुए कहा।

इसके बाद अपने डॉक्टर को राजी करने में नोवा को ज्यादा समय नहीं लगा। वो और मर्करी जब डॉक्टर के क्लीनिक में आए तो डॉक्टर ने मर्करी का चेकअप करने के बाद किसी तंत्रिका विशेषज्ञ से मिलने की सलाह दी। तंत्रिका विशेषज्ञ डॉक्टर सप्तऋषि ने मर्करी के दिमाग को स्कैन करने के बहाने कृत्रिम तंत्रिकाओं को रीप्रोग्राम कर दिया। उन्होंने नोवा और मर्करी को सलाह दी कि अभी भ्रूण का निर्माण करना उचित नहीं होगा क्योंकि मर्करी के दिमाग में कुछ अनियमितताएँ हैं जिनकी विस्तृत जाँच करनी पड़ेगी। उसके बाद ही वो कुछ बता पाएँगें।

अब डॉक्टर सप्तऋषि और नोवा को इंतजार करना था। इंतजार मर्करी की भावनाएँ वापस आने का।

तीन दिन बाद रात के बारह बजे मर्करी की आकृति नोवा के दूरभाष यंत्र पर प्रकट हुई। मर्करी ने अपना नाइट गाउन पहन रखा था और अपने शयन कक्ष से ही नोवा से संपर्क किया था। मर्करी की आवाज़ सुनकर नोवा उठ बैठा। मर्करी की बदहवास हालत देखकर ही उसे अंदाजा हो गया कि इसके भी स्वप्न में पुरानी यादें आनी शुरू हो गईं। मर्करी ने नोवा से कहा कि पिछले तीन दिनों से उसे अजीब अजीब स्वप्न दिखाई पड़ रहे हैं।

“ऐसे तुम्हारी समझ में नहीं आएगा। तुम्हें एक लंबी कहानी सुनानी पड़ेगी ऐसा करो तुम मेरे पास आ जाओ।” नोवा ने कहा।

“अभी।” मर्करी बोली।

“हाँ, बिल्कुल अभी। तुम्हें बहुत सारी बातें बतानी हैं।” नोवा ने कहा।

मर्करी को सारी बात समझाने में नोवा को तीन घंटे लग गए। बात करते करते दोनों नोवा के शयनकक्ष में ही सो गए। एक घंटे बाद मर्करी चीखकर उठ गई। उसने फिर कोई बुरा सपना देखा था। उसकी चीख सुनकर नोवा की नींद भी खुल गई।

“जब तक तुम्हारी यादें पूरी तरह वापस नहीं आ जातीं ऐसे बुरे सपने आते रहेंगे”। कहकर नोवा ने मर्करी को अपनी बाहों में भर लिया। नोवा के लिए ये बिल्कुल नया अहसास था क्योंकि अब तक नोवा ने केवल यंत्रों के ढाँचे पर कृत्रिम माँस से बनी साइबोर्ग स्त्री को हो अपनी बाहों में लिया था। साइबोर्ग स्त्री काम क्रीड़ा यंत्र का ही एक हिस्सा थी जो किसी का भी रूप और आकार ग्रहण कर अपने मालिक का मनोरंजन किया करती थी। जिस स्त्री का वो रूप ग्रहण करती थी उसे यंत्र बनाने वाली कंपनी रॉयल्टी देती थी। जो महिला इस तरह की कंपनी से संबंधित नहीं होती थी साइबोर्ग से उसका रूप ग्रहण करवाना तब तक कानूनन अपराध था जब तक की वह महिला उपभोक्ता के बच्चे की जैविक माँ बनने को तैयार न हो जाय या उपभोक्ता की विवाहिता न हो। ये यंत्र उपभोक्ता के दिमाग का गहन अध्ययन करने के पश्चात बनाए जाते थे और उपभोक्ता को बहुत ही कम समय में चरमानंद तक पहुँचा देने में सक्षम थे। ये यंत्र बहुत महँगे थे इसलिए ऐसे लोगों में इनकी माँग ज्यादा थी जिनके पास पैसों की कोई कमी नहीं थी किंतु समय का अभाव था। मर्करी की भी हालत नोवा के ही जैसी थी।

दूसरे दिन सुबह नोवा ने अपने डॉक्टर को सूचना दी कि उसने और मर्करी ने पहले विवाह करने और फिर प्राकृतिक तरीके से माँ बाप बनने का निर्णय लिया है।

कुछ ही दिनों में नोवा और मर्करी ने मिलकर उन सभी लोगों को कृत्रिम तंत्रिकाओं के प्रभाव से मुक्त करा लिया जो उड़नकार का प्रयोग करते थे। जो उड़नकार का प्रयोग नहीं करते थे उन्हें कभी न कभी तो इसका प्रयोग करना ही था। नोवा और मर्करी ने ऐसे सारे लोगों से संपर्क कर एक युवा मोर्चा बनाया। अगले चुनाव में युवा मोर्चा के समर्थन से स्लम की पार्टी जीती। नए दल ने बहुमत से संविधान और कानूनों में भारी बदलाव किए जिनमें से कुछ इस प्रकार थे।

1. न्यायपालिका को जिम्मेदार बनाया गया। हर निर्णय के लिए न्यायधीशों को अंक देने की व्यवस्था की गई। सही निर्णय के लिए धनात्मक अंक और ऐसे निर्णय जो उनसे ऊँची अदालतों द्वारा गलत करार दिए जाएँ उनके लिए ऋणात्मक अंक। न्यायधीशों की पदोन्नति एवं वेतनवृद्धि इस तरह से प्राप्त कुल अंको के आधार पर करने का निर्णय हुआ। यदि किसी न्यायधीश के कुल अंक ऋणात्मक हो जाएँ तो उसे सेवामुक्त करने का भी प्रावधान रखा गया।

2. धन का सारा विनिमय ऑनलाइन कर दिया गया एवं जिसके पास जितना धन हो उसे उतना क्रेडिट दे दिया गया। व्यक्ति का डीएनए, रेटिना और उँगलियों के निशान मिलकर उसके क्रेडिट कार्ड का काम करने लगे।

3. पूँजीपतियों द्वारा एक निश्चित सीमा से ज्यादा कमाया गया सारा धन कर के रूप में वसूलने और गरीबी रेखा के नीचे रहने वालों के खाते में सीधे क्रेडिट करने की व्यवस्था की गई।

आज 22 सितंबर सन 2192 है। नोवा और मर्करी एक बेटे और एक बेटी के माता पिता हैं। स्लम के हालात पहले से बेहतर हुए हैं मगर अमीरों और गरीबों के बीच का अंतर सैकड़ों वर्षों से पूँजीपतियों के सुनियोजित शोषण का परिणाम था इसे कम होने में कुछ दशक तो लगेंगे ही लगेंगे। कुछ युवा पूँजीपतियों की भावनाएँ वापस आ जाने से उम्मीद जगी है। पर कुछ ऐसे भी पूँजीपति हैं जो जन्म से ही भावनाहीन होते हैं ऐसे पूँजीपतियों के विरुद्ध स्लम की जंग जारी है|

Advertisements

Posted सितम्बर 28, 2012 by ‘सज्जन’ धर्मेन्द्र in Uncategorized

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: